जाने कितनी बातें...
जाने कितनी बातें दस्तक देती हैं
दिल के दरवाज़े
पर
कुछ देर शोर मचाती हैं
फिर चुप हो कर बैठ जाती हैं
!
आख़िर
जीना है मुझे,
सुकून से
बातें तो बातें होती हैं
, फुसला लेता हूँ
दिल के किसी कोने में दुबका देता हूँ
कहाँ लड़ती फिरेंगी सबसे !
डरपोक कहो या दानिशवर
मुतमईन या मामूली
नहीं कह पाता सब कुछ
, सचमुच
ख़ुद का आधा भी नहीं मैं !
Bhot khoob
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