इत्तेफ़ाक़ी / Love in the time of Corona (Ashish and Urooj)
इत्तेफ़ाक़ी थोड़ा सा वक़्त अपनों के साथ , फिर से गुज़ारा , तो एहसास हुआ कि , प्यार अभी भी बाक़ी है । खाया जो फिर से एक बार , उसके हाथों से निवाला , तो महसूस हुआ कि क्यों , सबसे ऊंची श्रेणी माँ की है । मालूम पड़ा कि मनचले है , वो भी हमारे ही जितने , पर बचपन से एक सख़्त छवि , कायम रखना पापा की चालाकी है । समझ में आया कि सिर्फ एक छुट्टी , या तोहफों का लेन देन नहीं , अपने अंदर एक अटूट विश्वास , और अनकहे वादे को समेटे रखती राखी है । पता चला कि ज़िन्दगी के इस समंदर में , मेरे लिए जो लड़ता है , झगड़ता है , पर मुझसे कुछ न कहता है , भाई मेरा वो तैराकी है । इस क़दर सबसे दूर कर , अपनों के क़रीब लाना , लगता है कि ख़ुदा की कोई साज़िश है , यक़ीन ही नहीं होता कि ये सब बस इत्तेफ़ाक़ी है । - आशीष गुप्ता Link to the Recitation of Hindi Poem: https://youtu.be/ZGs...